तमिलनाडु में दलितों ही नहीं सवर्णों ने भी दे डाली चुनाव बहिष्कार की धमकी, पेयजल में मानव मल मिलाने वाली घटना से है भारी रोष

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तमिलनाडु के लोग बोले पार्टियां चुनाव के समय अपने राजनीतिक फायदे के लिए हमारा इस्तेमाल कर रही हैं, पार्टियां हमारे मुद्दे का उपयोग अभियानों और टीवी विज्ञापनों के लिए करती हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान हमारे गांव को छोड़ देती हैं, हमें प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है…

LOKSABHA ELECTION 2024 : लोकसभा चुनाव में अब केवल कुछ दिन शेष हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के इस दौर में तमिलनाडु से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। जी हां, तमिलनाडु के पुडुकोट्टई में वेंगावायल दलितों, सवर्णों ने चुनाव बहिष्कार करने की धमकी दे डाली और इसकी मुख्य वजह दिसंबर 2022 की एक घटना है जिसने गांव वालों को अब तक परेशान कर रखा है।  इस घटना के आरोपियों को पुलिस वालों ने अब तक गिरफ्तार नहीं किया है। इसलिए गुस्साएं गांववालों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने के लिए कह डाला। आखिर क्या है पूरा मामला जानते हैं।

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क्या है पूरा मामला ?

पूरा मामला तमिलनाडु के पुडुकोट्टई का है, जहां पर वेंगावायल दलितों, सवर्णों ने चुनाव का बहिष्कार करने के लिए कहा है। दरअसल दिसंबर 2022 में गांव में ओवरहेड पेयजल टैंक में मानव मल मिलाने की घटना घटित हुई थी। 16 महीने बीत जाने के बावजूद भी आज तक पुलिस वालों ने अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया है। इस घटना से गांव वाले तकरीबन 16 महीनें से परेशान है। इसलिए गांव वालों ने अपराधियों को गिरफ्तार करने में पुलिस की विफलता का हवाला देते हुए लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दे डाली है।

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लोकसभा चुनाव बहिष्कार की मांग

जानकारी के मुताबिक विशेष रुप से पुदुक्कोट्टई के वेंगाईवयाल के दलितों और एलोरईयूर गांव के लोगों का ये कहना है कि ओवरहेड पेयजल टैंक में मानव मल मिलाने की घटना के आरोपियों का अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर होने के कारण वे लोकसभा चुनाव का बहिष्कार चाहते हैं। इस मामले में मुख्य रुप से दोनों गांव के लेगों का कहना है कि इस घटना के मामले में अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने समर्थन मांगने के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है। इस घटना से वेंगाईवयाल और एलोरईयूर गांव के लोग 16 महीने से परेशान है लेकिन मामले की जांच कर रही सीबी-सीआईडी को अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

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दोषियों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार करें

इस घटना के मामले में 15 अप्रैल सोमवार को 30 से अधिक दलित परिवारों ने बैनर लगाए, जिसमें जांच में देरी को लेकर चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी गई थी। लेकिन इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने अनुमति न मिलने पर इसे हटा लिया था। गांव वालों ने घटना के मामले में कहा कि ‘हम चाहते हैं कि दोषियों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार किया जाए। वेंगाईवायल के एक ऑटो चालक केआर मुरुगेसन (57) ने कहा, ‘हमने विरोध के तौर पर चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। “हम लगातार पुलिस निगरानी में हैं और हमने अपने ही गांव में अपनी आजादी खो दी है। अधिकारियों द्वारा हमसे नियमित रूप से पूछताछ की जा रही है और विभिन्न परीक्षणों के लिए बुलाया गया है। जिसकी वजह से हमारी मामनसिक शांति भंग हो रही है मानसिक शांति खोने के बाद चुनाव में भाग लेने का क्या मतलब है।“

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गांव वालों ने क्या कहा ?

द न्यूज़ मिनट के अनुसार, गांव वालों का ऐसा भी कहना है कि पार्टियां चुनाव के समय अपने राजनीतिक फायदे के लिए हमारा इस्तेमाल कर रही हैं। प्रचार वाहन आस-पास के गांवों में घुस रहे हैं लेकिन हमारे गांव को छोड़ रहे हैं एक अन्य निवासी का ये भी कहना है कि पार्टियां वेंगावायल में 30 परिवारों को एक बड़ी संख्या के रूप में नहीं देखते हैं पार्टियां हमारे मुद्दे का उपयोग अभियानों और टीवी विज्ञापनों के लिए करती हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान हमारे गांव को छोड़ देती हैं। हमें प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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चुनाव का बहिष्कार ,विरोध को दिखाने का एकमात्र तरीका :

घटना के मामले में एरयूर गांव के एम कधीर ने कहा, ‘हर महीने, हमें विभिन्न परीक्षणों के लिए सीबी-सीआईडी अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ता है. हमें कथित तौर पर अस्पृश्यता का अभ्यास करने के लिए बैक-टू-बैक मामलों के साथ थप्पड़ मारा जाता है। चुनाव का बहिष्कार करना हमारे विरोध को दिखाने का एकमात्र तरीका है।

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