फेक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन राहत भी नही आ सकेगी काम

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ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त अंतरिम जमानत दी है।

लेकिन शर्तों के साथ और इस दौरान आप ट्वीट नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार समेत अन्य को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि गलत बयानबाजी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह गंभीर मामला है, इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। मेहता ने कहा कि हलफनामा तक दाखिल कर दिया गया है। वहीं जुबैर के वकील कॉलिन गोंसॉलविस ने कहा कि एफआईआर और इस संबंध में चल रही प्रक्रिया रद्द की जानी चाहिए। मेरे खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। इसपर पीठ ने कहा कि आप जमानत की मांग लेकर आए हैं।

गोंसॉलविस ने कहा कि हाईकोर्ट से हमने एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। जिसके आदेश के खिलाफ यह अपील की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा जुबैर की तरफ से वकील ने कल कहा कि जुबैर की जान को खतरा है, बिना किसी हलफनामे को दाखिल कर यह कहना गलत है। कल जुबैर की जमानत अर्जी खरिज हुई है, कल दोपहर बाद उसकी पुलिस कस्टडी मिली है। जुबैर की तरफ से कोर्ट को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।

विवादास्पद ट्वीट को स्वीकार किया
वकील कॉलिन गोंसॉलविस ने जुबैर के लिए तर्क देते हुए कहा कि वह विवादास्पद ट्वीट को स्वीकार करते हैं और किसी भी जांच की आवश्यकता नहीं है। गोंसॉलविस ने ट्वीट को पढ़कर तर्क दिया कि यह धर्म के बारे में नहीं था। जुबैर के वकील ने कहा कि जिन लोगों ने हेट स्पीच दी वह जमानत पर हैं, जब मेरे मुवक्किल ने उनको हेट मॉर्गन कहा तो मैं गलत हो गया। अब हेट स्पीच के खिलाफ ट्वीट करने वाले जेल में हैं। वकील ने कहा जुबैर को पुलिस कस्टडी में भेजा गया, क्योंकि उसके फोन की जांच करनी थी, लेकिन जब मैंने स्वीकार किया कि मैंने ट्वीट किया है तो उनको मेरे फोन की जांच क्यों करनी है। हेट स्पीच करने वालों को जिन्होंने एक्सपोज किया, वह जेल में, यह कैसा देश बन रहा है।

गोंसॉलविस ने कहा, देखिए इस देश में क्या हुआ है। मामले को उजागर करने वाला जेल में है और अभद्र भाषा बोलने वाले जमानत पर बाहर हैं। अदालत के खिलाफ टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की थी। मैंने अदालत के खिलाफ, संविधान के खिलाफ इस तरह की जहरीली भाषा का पर्दाफाश किया, और मैं उसके लिए जेल में हूं? एसजी तुषार मेहता ने कहा कि बहुत से तथ्य छिपाए गए हैं। आरोपी एक फैक्ट चैकर वेबसाइट चलाता है, जिसे विदेश से फंडिंग भी मिल रही थी। जिसकी जांच चल रही है। मैं अभी उस पर नहीं जा रहा हूं। आरोपी की वजह से कानून व्यवस्था गंभीर हो सकती थी। दिल्ली की कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया था और फिर रिमांड की मंजूरी दी थी।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी ने सबकुछ इरादतन किया। अब वह दावा कर रहा है कि फैक्ट चैकर वेबसाइट चलाता है। यह एक या दो ट्वीट का मामला नहीं है। यह मामला माहौल खराब करने के लिए समाज में आस्थिरता लाने का है। यह बात भी छुपाई गई कि पुलिस की विदेशी फंडिंग को लेकर भी जांच हो रही है, फैक्ट चेक के नाम पर विदेश से फंडिंग लेने का आरोप है। उन्होंने कहा कि जुबैर आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले भी मामले हैं। पीठ ने पूछा कि IPC की धारा 295, 153 इस मामले में लागू होती है। पुलिस जांच अधिकारी की ओर से ASG एसवी राजू ने कहा कि अदालत को इस बारे में मैं विस्तार से जानकारी दूंगा।

वहीं ASG राजू ने कहा कि बजरंग मुनि सम्मानित धर्म गुरु हैं, उनके सीतापुर में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं, अगर उनको हेट मॉर्गन कहा जाएगा, तो इससे माहौल खराब हो सकता है। जुबैर ने पुलिस को हेट स्पीच के बारे में ट्वीट नहीं दिया। एसजी ने कहा कि आप सिस्टम से खिलवाड़ नहीं कर सकते। आरोपी ने यह सबकुछ जानबूझकर किया है। ASG ने कहा कि प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट ने भी यही पाया कि आरोपी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

बता दें दिल्ली पुलिस ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक जुबैर के खिलाफ ट्वीट के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में जांच कर रही है। इससे पहले चार जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सीतापुर के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मोहम्मद जुबैर को पेश किया था, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस बाद में जुबैर को वापस दिल्ली ले गई थी।

मोहम्मद ज़ुबैर को 27 जून को दिल्ली पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जुबैर के वकील मुकुल मिश्रा ने तब मीडियाकर्मियों को बताया था कि अभी तक ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा-66 लगी हुई थी और पुलिस ने आज आईपीसी की धारा 153 ए को जोड़ा।

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