बदायूं सिविल जज ज्योत्सना राय ने की आत्महत्या, सरकारी आवास में फंदे पर लटकती मिली लाश

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ज्योत्सना राय बदायूं में महिला जज के तौर पर तैनात थीं, और उनका शव आज 3 फरवरी की सुबह संदिग्ध हालात में बरामद हुआ है। ज्योत्सना अपने क्वार्टर में अकेली रहती थीं। उनके बारे में यह बात भी सामने आ रही है कि 29 वर्षीय ज्योत्सना अभी अविवाहित थीं….

Badaun Civil Judge suicide : कुछ समय पहले यूपी की ही एक महिला जज ने सिस्टम से परेशान होकर चीफ जस्टिस आफ इंडिया से आत्महत्या की इजाजत मांगी थी, और आज योगी के रामराज में एक महिला जज इस सिस्टम की भेंट चढ़ भी गयीं। बदायूं की महिला जज ज्योत्सना राय द्वारा खुदकुशी किये जाने का मामला सामने आया है। प्रथमदृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, क्योंकि उनका शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था।

इस मामले में एसपी बदायूं आलोक प्रियदर्शी ने मीडिया को दिये बयान में कहा, पुलिस मौके पर पहुंच गई गई है। उनका आवास पहली मंजिल पर है। दरवाजे अंदर से बंद थे, उसे जबरदस्ती खोला गया और उनका शव छत के पंखे से लटका हुआ मिला। शव को कब्जे में ले लिया गया है। पुलिस हिरासत में ले लिया गया है और जांच की जा रही है। दस्तावेजों में कुछ चीजें मिली हैं। सभी तथ्यों की जांच की जाएगी। फॉरेंसिक टीम ने भी जांच की है।’

जानकारी के मुताबिक ज्योत्सना राय बदायूं में महिला जज के तौर पर तैनात थीं, और उनका शव आज 3 फरवरी की सुबह संदिग्ध हालात में बरामद हुआ है। ज्योत्सना अपने क्वार्टर में अकेली रहती थीं। उनके बारे में यह बात भी सामने आ रही है कि 29 वर्षीय ज्योत्सना अभी अविवाहित थीं। उनकी मौत की खबर सुनने के बाद मौके पर भारी संख्या में वकील इकट्ठा हो गये।

मीडिया में आ रही जानकारी मऊ जिले की रहने वाली ज्योत्स्ना राय बदायूं कोर्ट में सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात थीं। आज सुबह उनकी लाश संदिग्ध परिस्थितियों में जजेस क्वार्टर्स कॉलोनी स्थित उनके आवास पर लटका हुआ बरामद हुआ है। जानकारी मिलने पर पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचें और फॉरेंसिक टीम भी पहुूंची।

फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक टीम उनकी संदिग्ध मौत मामले की पड़ताल कर रही है। ज्योत्सना राय का मोबाइल पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। मृत्यु के कारण की जांच पड़ताल के लिए उनका शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतक सिविल जज के परिजन लखनऊ में रहते हैं, जिन्हें घटना की सूचना दे दी गई है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों एक महिला जज ने सीजेआई चंद्रचूड़ से आत्महत्या की इजाजत मांगते हुए पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि “एक विशेष जिला न्यायाधीश और उनके सहयोगियों द्वारा मेरा यौन उत्पीड़न किया गया है। मुझे रात में जिला जज से मिलने के लिए कहा गया। मैंने 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक न्यायाधीश (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) से शिकायत की। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसी ने भी मुझसे यह पूछने की जहमत नहीं उठाई कि ‘क्या हुआ, आप परेशान क्यों हैं।”

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