Prakash Ambedkar : दलितों और वंचितों की आवाज बनकर उभरे और भारत का संविधान लिखने वाले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर फिलहाल मीडिया में चर्चा का केंद्रबिंदु बने हुए हैं। कारण है अयोध्या में होने वाला राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन। जी हां, राम मंदिर के कारण ही प्रकाश अंबेडकर चर्चा में हैं।
गौरतलब है कि प्रकाश आंबेडकर को राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है। अपने एक्स हैंडल पर इस बात की पुष्टि करते हुए प्रकाश अंबेडकर लिखते हैं, ‘मुझे अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण मिला। मैं उक्त कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊंगा क्योंकि यह कार्यक्रम भाजपा-आरएसएस द्वारा हथिया लिया गया है। एक धार्मिक आयोजन चुनावी लाभ के लिए एक राजनीतिक अभियान बन गया है। मेरे दादा डॉ. बीआर अम्बेडकर ने चेतावनी दी थी कि ‘यदि पार्टियाँ धर्म को देश से ऊपर रखेंगी, तो हमारी स्वतंत्रता दूसरी बार ख़तरे में पड़ जाएगी और संभवतः हमेशा के लिए खो जाएगी।’ मेरे दादाजी का डर आज हकीकत बन गया है। भाजपा-आरएसएस, ‘जो देश के ऊपर धर्म को स्थान देती है’ ने इस धार्मिक आयोजन को अपने राजनीतिक लाभ के लिए हथिया लिया है।’
डॉ. बीआर आंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर वंचित बहुजन आघाड़ी ;वीबीए के अध्यक्ष हैं, जो समाज के वंचित वर्गों के विकास के लिए निरंतर अग्रसर है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल न होने के आशय का पत्र उन्होंने राममंदिर तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख चंपत राय को भी लिखा है, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
पिछले दिनों प्रकाश अंबेडकर ने नये संसद भवन के निर्माण के बाद यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि वह संसद से प्रधानमंत्री मोदी का नाम मिटा देंगे। मुंबई के भांडुप में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, ‘वंचितों के बिना कोई सत्ता में नहीं आ सकता है। सत्ता चाहिए तो वंचितों, दलितों, शोषितों का साथ जरूरी है। हम सत्ता में आए तो नए संसद भवन से पीएम नरेंद्र मोदी का नेम प्लेट हटाएंगे और नए संसद भवन फिर से उद्घाटन करवाएंगे। उद्धव ठाकरे को मेरी सलाह है कि वे महाविकास आघाड़ी के अपने पार्टनरों से बचकर रहें। कभी भी उनकी बलि दी जा सकती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले अंग्रेजी पिक्चर की तरह समझ नहीं आते हैं।’
प्रकाश अंबेडकर मुस्लिमों की सत्ता में भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं। वो कह चुके हैं, ‘मुसलमानों के पास आज पॉलिटिकल लीडरशिप नहीं, फिर भी मुसलमानों के एक होना चाहिए, क्योंकि आज एक बार फिर 1947 जैसे हालात हैं। जब तक हम अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे तब तक आगे का रास्ता नहीं निकलेगा। प्रकाश आंबेडकर ने यह दावा किया कि कर्नाटक का फैसला अगर विरोध में गया तो बीजेपी देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करेगी।’
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