यूपी के सरकारी स्कूल में बच्चों से बनवाई जा रही रोटियां और दिया जा रहा मिलावटी दूध

Share News:

यूपी के सरकारी स्कूल की रसोई का ये वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे है जहां पढ़ने के लिये आने वाले छात्र छात्राओं की सेहत से सरे आम खिलवाड किया जा रहा है खबर में हम आगे बढे उससे पहले आप ये वीडियो देखिए

क्या है पूरा मामला

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है बच्चो को मिड डे मिल में दिए जाने वाले ढाई लीटर दूध में 1 बाल्टी पानी मिलाया जा रहा है और दूसरी तरफ स्कूल में ही आयी छात्राओं से रोटियां भी बनवायी जा रही है। बता दें कि सरकार द्वारा देशभर के स्कूलों में आने वाले छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए प्रत्येक बुधवार को दूध वितरित कर आती है प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक छात्र छात्रा को 150ML और पूर्व माध्यमिक व माध्यमिक विद्यालय में 200ML प्रति छात्र दूध उपलब्ध कराया जाता है। दूध के नाम पर बच्चों को पानी पिलाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा है ।

कब और कहा का है ये वीडियो

वायरल होता यह वीडियो उत्तर प्रदेश, जिला बुलंदशहर के संविलियन विद्यालय भावसी का है जो 29 सितम्बर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था

कौन है मुख्य आरोपी

वायरल वीडियो की सत्यता जांचने के लिए दलित टाइम्स की टीम ने बुलंदशहर के BSA (Basic Shiksha Adhikari) अखंड प्रताप सिंह जी से बात की दलित टाइम्स से बातचीत के दौरान अखंड प्रताप सिंह जी ने बताया कि स्कूल में प्रधानाध्यापक अरुण कुमार शर्मा व सहायक अध्यापक फूल सिंह के बीच तनाव चलते दोनों अध्यापक एक दूसरे को फसाने के लिए अक्सर षडयंत्र रचने की फिराक में रहते हैं। जिसमे मौका मिलते हे सहायक अध्यापक फूल सिंह ने रसोइया से कह कर दूध में पानी डालते हुए और छात्राओं से रोटियां बनवाने का वीडियो बनाया ताकि प्रधानाध्यापक अरुण कुमार शर्मा को बदनाम कर सके

बीएसए अधिकारी अखंड प्रताप सिंह

(बीएसए अधिकारी अखंड प्रताप सिंह)

आरोपी के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई

BSA (Basic Shiksha Adhikari) अखंड प्रताप सिंह जी ने आगे बताया की प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक को देषी मानते हुए विद्यालय में कार्यरत अरुण कुमार शर्मा व फूल सिंह के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है
विद्यालय में कार्यरत अन्य अध्यापक संजय कौशिक, अनुराग कुमार को वेतन अवरुद्ध कर दिया गया है

*दलित टाइम्स उन करोड़ो लोगो की आवाज़ है जिन्हें हाशिए पर रखा गया है। *

महिला, दलित और आदिवासियों के मुद्दों पर केंद्रित पत्रकारिता करने और मुख्यधारा की मीडिया में इनका प्रतिनिधित्व करने के लिए हमें आर्थिक सहयोग करें।

  Donate

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *