हरियाणा सहित उत्तर भारत में जातिय हिंसा को बढ़ावा देने में जाति विशेष के महिमामंडन वाले गाने भी जिम्मेदार : रजत कल्सन

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हाल में ही हरियाणा सरकार ने गुंडागर्दी व गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले गानों पर बैन लगाने का काम किया है। इस पर बात करते हुए नेशनल एलायंस फ़ॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक अधिवक्ता रजत कल्सन ने एक बयान जारी कर कहा कि हरियाणा सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है उन्होंने हरियाणा सरकार से इसी संदर्भ में मांग की है कि हरियाणा राज्य में एक जाति विशेष का महिमामंडन करने तथा जातीय घमंड तथा नफरत पैदा करने वाले गाने पिछले काफी समय से प्रचलन में है जो अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जातिय हिंसा का कारण बनते हैं तथा इन गानों से समाज में जाति का जहर भी फैल रहा है। इन गानों पर भी तुरंत बैन लगाया जाना चाहिए…
कल्सन ने कहा कि यह एक विचारणीय मुद्दा है। जातीय दम्भ और कटुता फैलाने वाले गानों पर रोक लगाने की मांग सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी है । उन्होंने कहा ऐसे गाने  नफरत, हिंसा और आक्रामकता तथा दो समुदायों के बीच तनाव को बढ़ावा देते हैं, इसलिये उन पर कानूनी लगाम लगाना जरूरी है।
कल्सन ने कहा की हालांकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 हमें अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की आजादी देता है लेकिन इस तरह की जातिय दम्भ भरे गाने केवल एक जाति विशेष को ऊंचा दिखाने तथा बाकि जातियों को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति के हैं जो भारतीय संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
कल्सन ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहां जाति एक संवेदनशील विषय है, ऐसे गानों पर रोक लगाने की मांग समझ में आती है। कानूनी तौर पर, भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 295ए पहले से ही उन सामग्रियों पर प्रतिबंध लगाती हैं जो धार्मिक, जातिगत या सामुदायिक नफरत को बढ़ावा देती हैं। अगर कोई गाना इन सीमाओं को पार करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई संभव है।
कल्सन ने कहा हरियाणा में जातीय नफरत के आधार पर हो रही हिंसा पिछले 15 सालों से चरम पर है तथा हरियाणा में मिर्चपुर कांड, भगाना कांड, भाटला कांड, डाबड़ा गैंगरेप केस कांड जैसे सैकड़ो कांड दलितों के साथ अंजाम दिए गए हैं तथा इस तरह के माहौल में जातीय नफरत और भेदभाव को बढ़ावा देने वाले गाने आग में घी डालने का काम कर सकते हैं।
कल्सन ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि तुरंत प्रभाव से इस तरह के गीतों व गानों पर रोक लगाने के लिए हरियाणा सरकार विधानसभा में एक बिल लेकर आए तथा इन गानों पर रोक के लिए फोरी तौर पर एक अध्यादेश जारी करें। कल्सन ने कहा कि प्रदेश की आम जनता खास तौर पर एससी एसटी समाज के लोगों से अपील की जाती है कि वे वैमनस्य तथा भेदभाव को बढ़ावा देने वाले इन गानों को युटुब, फेसबुक, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर इन गानों को जातीय हिंसा के तौर पर रिपोर्ट करें तथा इन पर बैन लगाने की सिफारिश करें।

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