क्या आपको पता है? बाबा साहब अंबेडकर के पास थीं 26 उपाधियां

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बाबा साहब अंबेडकर के पास के 26 उपाधियां थी, जो विश्व में अन्य किसी के पास नहीं। वहीं, 14 अप्रैल का दिन बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती का दिन है, जिसे ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाते हैं। ऐसे महान व्यक्ति को कभी भूला नहीं जा सकता, जिनकी बदौलत ही हमें कानून की जानकारी और संविधान मिला।

बाबा साहब अंबेडकर ( Image : google )

संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। डॉ. अम्बेडकर वैश्विक युवाओं के लिये प्रेरणा स्त्रोत हैं, क्योंकि उनके नाम के साथ बीए, एमए, एमएससी, पीएचडी, बैरिस्टर, डीएससी, डी. लिट्. आदि कुल 26 उपाधियां जुडी है। वे अपने समय के ‘सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे व्यक्ति’ थे, जिनका नाम आज भी Most educated person की लिस्ट में शुमार है।

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बाबासाहेब आंबेडकर को पढ़ने का बहुत शौक था, वे प्रतिदिन अठारह घंटे अध्ययन करते थे। उनकी शैक्षिक योग्यता, विद्वता और प्रतिभा इतनी व्यापक और शानदार है कि उन्हें ‘दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति’ के साथ-साथ ‘ज्ञान के प्रतीक’ (सिम्बॉल ऑफ नॉलेज) के रूप में जाना जाता है।

 

बाबा साहब अंबेडकर ( Image : google )

 

बाबा साहब अम्बेडकर ने मुंबई विश्वविद्यालय से BA की शिक्षा प्राप्त की। कोलंबिया विश्वविद्यालय से MA, PHD, LLD और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से MSC और DSC की शिक्षा प्राप्त की। साथ ही बाबासाहेब ने ग्रेज इन से (बैरिस्टर-एट-लॉ) आदि की शिक्षा भी प्राप्त की।

भीमराव अंबेडकर की शुरुआती पढ़ाई दापोली और सतारा में हुई और वे साल 1907 में बंबई के एलफिन्स्टोन स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। वहीं, बड़ौदा नरेश सयाजी राव गायकवाड की फैलोशिप पाकर अंबेडकर ने 1912 में मुबई विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा पास की। संस्कृत पढ़ने पर मनाही होने से वह फारसी से पास हुए. – बी.ए. के बाद एम.ए. की पढ़ाई के लिए बड़ौदा नरेश सयाजी गायकवाड़ की दोबारा फैलोशिप पाकर उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।

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साल 1915 में उन्होंने स्नातकोत्तर उपाधि की परीक्षा पास की। 1916 में कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका से ही उन्होंने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।साथ ही लंदन यूनिवर्सिटी से आंबेडकर ने डॉक्टर्स ऑफ साइंस की उपाधि भी हासिल की।इकोनामिक्स एंड पोलिटिकल सांइस में एम.एससी. और डी. एस सी. और ग्रेज इन नामक विधि संस्थान में बार-एट-लॉ की उपाधि के लिए रजिस्टर किया और भारत लौटे।

 

‘पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी’ बाबा साहब अम्बेडकर ( Image : dalit times )

 

बाबा साहब अम्बेडकर ने मूक और अशिक्षित और गरीब लोगों को जागरुक बनाने के लिए मूकनायक और बहिष्कृत भारत साप्ताहिक पत्रिकाएं भी संपादित की। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को कोलंबिया विश्वविद्यालय ने एल.एलडी और उस्मानिया विश्वविद्यालय ने डी. लिट् की मानद उपाधियों से सम्मानित किया था इस प्रकार डॉ. अम्बेडकर वैश्विक युवाओं के लिये प्रेरणा बन गए, क्योंकि उनके नाम के साथ बीए, एमए, एम.एससी, पीएच.डी, बैरिस्टर, डीएससी आदि कुल 26 उपाधियां।

 

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बाबासाहेब अंबेडकर एक महान विचारक, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ होने के साथ ही दार्शनिक, लेखक पत्रकार, समाजशास्त्री,, इतिहासविद्, सम्पादक, वकील, और प्रोफेसर भी रहें है , जिसके लिए बाबासाहेब को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। बाबासाहेब अंबेडकर ने मनुष्यता को हासिल करने का मंत्र देते हुए 29 जुलाई, 1942 को नागपुर की एक सभा में कहा कि- ‘शिक्षित बनो, आंदोलन करों, संगठित रहो, आत्मविश्वासी बनो, कभी भी हार मत मानो, यही हमारे जीवन के पांच सिद्धांत हैं।’

वहीं ,बाबासाहेब अजीवन अछूतों और महिलाओं के साथ साथ सभी भारतीयों की शिक्षा के लिए प्रयास करते रहे। बाबासाहेब ने वंचित एवं दलित समुदाय की शिक्षा के लिए ‘पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की थी, क्योंकि बाबासाहेब शिक्षा को देश तथा समाज के विकास का साधन मानते थे। शिक्षा विनय और शील इन तीनों को बाबा साहेब ने अपना आराध्य देव माना है। शिक्षा को प्रथम अराध्य मानते हुए उन्होंने कहा कि- ‘शिक्षा बिना मनुष्य शान्ति और मनुष्यता दोनों प्राप्त नही है।’

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