समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव और उनके भाई गुलशन यादव पर दलित उत्पीड़न, धोखाधड़ी और धमकी देने के आरोप लगे हैं। दलित पीड़ित राजकुमार सरोज ने आरोप लगाया कि जमीन के बैनामे के सौदे के बाद यादव भाइयों ने अतिरिक्त पैसे मांगे और धमकाया।
UP News: प्रतापगढ़ जिले के हथिगवां थाना क्षेत्र में दलित उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव, उनके बड़े भाई गुलशन यादव और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। दलित पीड़ित राजकुमार सरोज ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि यादव भाइयों ने धोखाधड़ी कर न केवल उससे पैसों की अवैध मांग की, बल्कि धमकियां भी दीं, जो दलित समाज के साथ हो रहे शोषण और उत्पीड़न का एक और उदाहरण है।
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2 लाख 30 हजार रुपये में सौदा तय किया
राजकुमार सरोज, जो अमान सिंह का पुरवा गांव के निवासी हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कुंडा कस्बे के कबरियागंज में स्थित एक मकान के बैनामे के लिए छविनाथ यादव से 2 लाख 30 हजार रुपये में सौदा तय किया था। इस सौदे के तहत उन्होंने पहले 30 हजार रुपये एडवांस भी दे दिए थे। परंतु, छविनाथ यादव के जेल जाने के बाद, जब राजकुमार शेष रकम देने उनके घर पहुंचे, तो वहां उनके बड़े भाई और कार्यवाहक जिलाध्यक्ष गुलशन यादव मिले। राजकुमार ने गुलशन यादव को बाकी 2 लाख रुपये भी दे दिए, यह उम्मीद करते हुए कि सौदा पूरा हो जाएगा।
पुलिस में शिकायत दर्ज
हालांकि, जब छविनाथ यादव एक दीवानी मुकदमे की पेशी के दौरान जेल से बाहर आए, तो राजकुमार ने उनसे मकान का बैनामा करने की बात कही। राजकुमार का दावा है कि इस पर छविनाथ यादव ने अतिरिक्त एक लाख रुपये की मांग की और धमकाया कि जब तक यह रकम उनके घर नहीं पहुंचाई जाएगी, तब तक बैनामा नहीं किया जाएगा। इस धमकी और अवैध धन उगाही से पीड़ित राजकुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए यादव भाइयों और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
दलित समाज पर अत्याचार और शोषण चिंताजनक
यह मामला दलित समाज के खिलाफ लगातार हो रहे अत्याचार और शोषण की एक चिंताजनक कड़ी है। दलितों के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामलों में अक्सर राजनीतिक और सामाजिक प्रभावशाली व्यक्तियों का हाथ होता है, और उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को धमकियां दी जाती हैं या कानूनी प्रक्रिया में उलझाकर उन्हें न्याय से वंचित किया जाता है। इस केस में भी ऐसा ही प्रतीत होता है, जहां एक दलित व्यक्ति से पहले धोखाधड़ी की गई और फिर उसे धमकाकर आर्थिक शोषण करने की कोशिश की गई। यह स्थिति दलित समाज के खिलाफ उत्पीड़न की संरचनात्मक और संस्थागत समस्याओं को उजागर करती है, जो आज भी हमारे समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं।
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न्यायिक हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता
पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच शुरू की है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पीड़ित को न्याय मिलता है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक प्रभावशाली लोग अपनी ताकत के बल पर मामले को दबाने की कोशिश करेंगे। दलितों के अधिकारों और उनके खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर त्वरित न्यायिक हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि समाज में समानता और न्याय की स्थापना हो सके।
यह घटना दलितों के साथ हो रहे दमन की गहरी समस्याओं की ओर इशारा करती है, और इस तरह के मामलों में न्यायपालिका और प्रशासन को मजबूत कदम उठाने की जरूरत है ताकि दलित समाज को उनके अधिकार और सम्मान मिल सके।
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