रोहित वेमुला केस में अमित शाह के बयान पर भाई राजा वेमुला और दलित कार्यकर्ताओं ने जतायी कड़ी आपत्ति, आंदोलन का मजाक उड़ाने का लगाया आरोप

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अमित शाह ने रिपब्लिक टीवी को दिये इंटरव्यू में कहा “रोहित वेमुला आंदोलन को एससी और एसटी को उकसाने और ध्रुवीकरण की राजनीति के रूप में महत्व दिया गया था…

Rahith Vemula Death case, What is Rohith Vemula Caste : रोहित वेमुला मामले में तेलंगाना पुलिस ने जो क्लोजर रिपोर्ट दी और उसमें दावा किया गया कि वेमुला ने इसलिए आत्महत्या कर ली थी, क्योंकि वह कई चीजों को लेकर तनाव में था। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि राेहित वेमुला दलित नहीं था और तेलंगाना पुलिस ने यह रिपोर्ट रोहित वेमुला की मौत के 100 महीने बाद दाखिल की थी। क्लोजर रिपोर्ट और आरोपियों को क्लीनचिट मिलने के बाद से रोहित वेमुला की जाति का सवाल मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है।

अब रोहित वेमुला की जाति को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक इंटरव्यू चर्चा में है। रिपब्लिक भारत को दिये गये एक साक्षात्कार में रोहित वेमुला के भाई राजा वेमुला समेत तमाम दलित कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कथित जातिगत भेदभाव के कारण अपनी जान लेने वाले हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोधछात्र के लिए न्याय की मांग करने वाले उनके आंदोलन का मजाक उड़ाने पर आपत्ति जताई है।

आत्महत्या करने वाले दलित पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला के भाई और दलित कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के इंटरव्यू के बाद जारी एक बयान में उनकी बात पर आपत्ति जतायी है। अमित शाह ने रिपब्लिक टीवी को दिये इंटरव्यू में कहा कि, “रोहित वेमुला आंदोलन को एससी और एसटी को उकसाने और ध्रुवीकरण की राजनीति के रूप में महत्व दिया गया था।

रोहित के भाई राजा वेमुला और अन्य दलित कार्यकर्ताओं द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘रोहित वेमुला दलित है, जिसके बचाव की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उसका जीवन ही भेदभाव और संघर्ष की मात्रा को बयां करता है, जिसका अमित शाह और भाजपा समर्थकों को कोई अंदाज़ा नहीं है, क्योंकि वे प्रमुख जाति हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं,”

गौरतलब है कि 4 मई को दिये गये एक इंटरव्यू में अमित शाह ने रोहित वेमुला केस में कांग्रेस का उल्लेख करते हुए उसको न्याय दिलवाने वाले अभियान को “निरर्थक” बताया था।

तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस ने हाल ही में एक क्लोजर रिपोर्ट दायर कर कहा था कि रोहित दलित नहीं था और उसने शायद दलित होने का झूठा दावा करने के परिणामों के डर से अपनी जान ले ली। पुलिस की ​इस रिपोर्ट पर उसकी मां और भाई बुरी तरह भड़क गये, जिसके बाद डीजीपी ने दोबारा केस को खोलकर जांच का आश्वासन दिया। कहा है कि रोहित वेमुला की मौत मामले में तेलंगाना पुलिस आगे जांच जारी रखेगी। तेलंगाना पुलिस के डीजीपी रवि गुप्ता की तरफ से जारी किए गए प्रेस नोट में कहा गया, ‘मृतक की मां और उनके भाई ने कुछ लोगों पर संदेह व्यक्त किए हैं, इसलिए मामले की जांच आगे जारी रखने का फैसला लिया गया है।’

अब रोहित वेमुला के भाई और अन्य दलित कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के इंटरव्यू के बाद जो बयान मीडिया को जारी किया है, उसके साथ यह साबित करने के लिए कि वास्तव में रोहित दलित था, तीन अलग-अलग सरकारी दस्तावेज़ अटैच किये हैं।

बयान में कहा है, “रोहित की आत्महत्या के बाद ही भाजपा ने एक झूठी शिकायत शुरू की थी कि रोहित वेमुला दलित नहीं है। यह शिकायत दर्शनपु श्रीनिवास राव द्वारा दायर की गयी थी, जिन्होंने 2019 में वेमुरु विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।’

बयान में आगे कहा गया है कि जब रोहित छात्र था, तब उसे निशाना बनाने वाले भाजपा और एबीवीपी नेताओं में से किसी ने भी उस पर दलित नहीं होने का आरोप नहीं लगाया था बल्कि उन्होंने उसका जातिगत उत्पीड़न किया था, क्योंकि वह दलित थे और अम्बेडकर को पढ़ने वाले दलित थे।”

बयान जारी करने वाले हस्ताक्षरकर्ताओं ने तेलंगाना पुलिस पर अदालत के सामने झूठ बोलने के लिए बुनियादी तथ्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि “तेलंगाना पुलिस द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट, जिसे रोहित वेमुला की हत्या में इन अपराधियों की संलिप्तता की जांच करनी थी, मामले के सभी सबूतों को नजरअंदाज कर देती है, ताकि यह अफवाह फैलाई जा सके कि वह दलित नहीं था।’

रोहित दलित नहीं है, बताकर क्लोजर रिपोर्ट पेश करने वाली तेलंगाना पुलिस पर सवाल उठाते हुए रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, ‘पुलिस वास्तव में जाति का निर्धारण कैसे कर सकती है? कास्ट सर्टिफिकेट की जांच में पुलिस की क्या भूमिका है? हमने 2017-18 में ही कलेक्टर को रिपोर्ट दी थी। 2019, 2020, 2021 में कोरोना के नाम पर जांच नहीं हुई। वास्तविक जांच पूरी हुए बिना इसका निर्णय कैसे होगा? ये सब बीजेपी की साज़िश से हो रहा है। रोहित एमएससी एंट्रेंस टेस्ट में पूरे भारत में पांचवें स्थान पर रहे. जेआरएफ़ में दो बार क्वालिफाई किया, उसके सर्टिफ़िकेट फर्ज़ी नहीं हैं। मैं हर बात जनता के सामने रखूंगी लोग नोटिस करेंगे। उसे दलित नहीं मानना एक राजनीतिक साज़िश है, हम सच्चे दलित हैं। अगर रोहित एससी नहीं है तो उसे यूनिवर्सिटी में दाखिला कैसे मिला? क्या उसके प्रमाणपत्रों की जांच के बाद ही उसे प्रवेश दिया गया? ये सब लोगों को गुमराह करने की कोशिश है, रोहित की मृत्यु एक दलित के रूप में हुई। उसे विश्वविद्यालय से निलंबित भी दलित होने के चलते किया गया था, मृत्यु के बाद जाति को दोष देना बहुत ग़लत है।’

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