यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारी पूरी कर ली हैं वही बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अब तक आगरा की नौ सीटों में से चार विधानसभाओं के प्रभारी नियुक्त किए हैं. बता दें, बसपा की नीति के अनुसार बनाए गए प्रभारियों को ही अब तक बाद में उम्मीदवार बनाया गया है.
एत्मादपुर, फतेहाबाद, दक्षिण के बाद बसपा ने छावनी विधानसभा सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है. इसके अलावा आगरा ग्रामीण, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़ और बाह सीट पर पार्टी जल्द ही अपना प्रत्याशी उतारेगी. मंगलवार को कार्यकर्ता सम्मेलन में आगरा छावनी से डॉ. भारतेंद्र अरुण को विधानसभा प्रभारी नियुक्त किया है. फतेहाबाद से सेलू जादौन, एत्मादपुर से सर्वेस बघेल, आगरा छावनी से डॉक्टर भारतेंदु अरुण, आगरा दक्षिण से रवि भारद्वाज का नाम सामने आया है.
गौरतलब है कि जिले की सभी सीटों पर टिकट के लिए उम्मीदवारों के बीच होड़ है. प्रत्याशियों की सबसे ज्यादा लंबी लाइन भाजपा में है. साथ ही समाजवादी पार्टी और रालोद के गठबंधन की आधिकारिक घोषणा और सीटों के बंटवारे क वजह से टिकट वितरण को लेकर दावेदारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
भाजपा ने 2017 के उत्तर प्रदेश के चुनाव में गैर-जाटव दलित और गैर-यादव ओबीसी वोटों में सेंध लगाते हुए बड़ी सफलता हासिल की थी। लेकिन इस बार भगवा दल ने और आक्रामक रणनीति अपनाते हुए बीएसपी सुप्रीमो मायावती के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने का फैसला लिया है। यूपी चुनाव में अब तक बसपा काफी कमजोर नजर आई है। ऐसे में भाजपा ने वोटों का बंटवारा करने के लिए जाटव समुदाय के बीच भी संपर्क बढ़ा दिया है। यह समुदाय बसपा का कोर वोटर माना जाता रहा है। भाजपा ने इस समुदाय के कम से कम 50 फीसदी वोट हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। यदि ऐसा होता है तो यह भाजपा के लिए बड़ी कामयाबी होगी और इसका असर नतीजों में भी देखने को मिल सकता है।