पेपर लीक के पर्याप्त सबूतों के बाद सुप्रीम कोर्ट का दोबारा NEET परीक्षा न कराने का फैसला कितना सही ?

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जब NTA ने सेंटर के अनुसार रिजल्ट जारी किया तो सबकी आंखें खुली की खुली रह गयी।  गुजरात के राजकोट के एक सेंटर से 12 कैंडिडेट को 700 से ज्यादा अंक मिले वहीं राजस्थान के सीकर के 8 कैंडिडेट के 700 से ज्यादा अंक आए हैं। जिसके बाद नीट परीक्षा और ज्यादा सवालों के घेरे में आ गयी।

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में घोषणा की है कि NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) की परीक्षा दोबारा नहीं होगी। यह निर्णय 23 जुलाई 2024 को सुनाया गया, जिससे लाखों छात्रों की उम्मीदों पर विराम लग गया। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा के दौरान हुई अनियमितताओं के बावजूद, इसे रद्द करना और दोबारा आयोजित करना संभव नहीं है। इससे पहले, 18 जुलाई को NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को निर्देश दिया गया था कि वे सेंटर वाइज रिजल्ट जारी करें, जो 22 जुलाई को प्रकाशित किया गया। कोर्ट ने NTA के काम की सराहना की और भविष्य में सुधार के लिए और कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि NEET परीक्षा के दौरान हुई अनियमितताओं के बावजूद, परीक्षा को रद्द करना और दुबारा आयोजित करना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कदम छात्रों के हित में नहीं होगा और इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “परीक्षा में किसी भी अनियमितता के बावजूद, यह महत्वपूर्ण है कि हम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।” कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है, लेकिन छात्रों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए।

NEET स्कैम :    

4 जून 2024 को नीट परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ था। इस परिणाम में 67 छात्रों को 720 में से 720 अंक प्राप्त हुए थे। इसके बाद नीट मामले ने तूल पकड़ना शुरू किया और धीरे धीरे से सामने आया कि, नीट पेपर लीक हुआ था। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नीट के पेपर लाखों में बिक रहे थे। इसके बाद तमाम राज्यों की पुलिस ने पेपर लीक मामले की गिरफ्तारियां की जिसमें सबसे ज्यादा गिरफ्तारी बिहार से की गयी। इसके बाद छात्रों और उनके परिजनों ने नीट का पेपर दोबार करवाने की मांग की जिसे लेकर कई प्रदर्शन भी हुए।

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NEET 2024 की परीक्षा में धांधली की रिपोर्ट सामने आने के बाद, छात्रों और अभिभावकों ने यह दावा करते हुए कि कुछ सेंटरों पर परीक्षा के दौरान अनियमितताएं हुई थी परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की मांग की थी। जिससे छात्रों को न्याय मिला सके। वहीं 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने NTA को आदेश दिया था कि वे सेंटर वाइज रिजल्ट जारी करें। इसके तहत 22 जुलाई को NTA ने सभी परीक्षा केंद्रों के रिजल्ट सार्वजनिक किए। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किस सेंटर पर किस प्रकार के परिणाम आए हैं।

इसके बाद जब NTA ने सेंटर के अनुसार रिजल्ट जारी किया तो सबकी आंखें खुली की खुली रह गयी।  गुजरात के राजकोट के एक सेंटर से 12 कैंडिडेट को 700 से ज्यादा अंक मिले वहीं राजस्थान के सीकर के 8 कैंडिडेट के 700 से ज्यादा अंक आए हैं। जिसके बाद नीट परीक्षा और ज्यादा सवालों के घेरे में आ गयी।

प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा :

मंगलवार को NTA द्वारा जारी किए रिजल्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नीट मामले पर सुनवाई की और एक ऐसा फैसला सुनाया इसके बाद छात्रों और उनके अभिभावकों के सपने टूट गए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि किसी भी परीक्षा को दोबारा आयोजित करने से प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा और छात्रों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा। इसलिए नीट-यूजी 2024 की परीक्षा दोबारा नहीं कराई जाएगी। इसके अलावा कोर्ट ने NTA के कार्य की सराहना की और सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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संसद में बहस :

22 जुलाई को बजट सत्र के पहले दिन संसद में विपक्ष द्वारा सबसे अहम मुद्दा नीट की रहा। इस दौरान अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर जमकर सवालों की बौछार की। अखिलेश यादव ने कहा कि इस सरकार ने कुछ किया या नहीं किया लेकिन ये सरकार पेपर लीक का रिकॉर्ड बनाकर रहेगी। वहीं राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर कहा कि, “गांधी ने कहा, “पूरे देश के लिए यह स्पष्ट है कि हमारी परीक्षा प्रणाली में बहुत गंभीर समस्या है, न केवल NEET में बल्कि सभी प्रमुख परीक्षाओं में।” उन्होंने दावा किया कि लाखों छात्र इस प्रणाली को धोखाधड़ी मानते हैं और इस मामले पर एक अलग एक दिवसीय चर्चा की मांग की। गांधी ने कहा, “मंत्री ने खुद को छोड़कर सभी को दोषी ठहराया है। मुझे नहीं लगता कि उन्हें यहां जो कुछ चल रहा है, उसके मूल सिद्धांतों की समझ है।”

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वहीं धर्मेंद्र प्रधान भारत के शिक्षा मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत में पिछले सात सालों में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है..हालांकि विपत्र ने उन्हें इस पर भी घेरा। क्योंकि मल्लिकार्जुन खड़गे जो की कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और राज्यसभा सांसद भी उन्होंने राज्यसभा में पिछले महीने एक आंकड़ा देते हुए बताया था कि पिछले 7 सालों में भारत में 70 पेपर लीक हुए हैं..।

छात्रों की प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद, छात्रों की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ छात्रों ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है, जबकि अन्य ने इसे निराशाजनक बताया है। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि परीक्षा दोबारा होगी, जिससे वे निष्पक्षता की उम्मीद कर रहे थे।  सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय NEET 2024 के उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के बावजूद, छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा। NTA को भी निर्देश दिया गया है कि वे भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला NEET परीक्षा को लेकर सभी अटकलों और अनिश्चितताओं को समाप्त करता है, और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

 

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