बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज बसपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चेताया कि हर प्रकार की अफवाहों के अलावा विरोधी पार्टियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकण्डों से दूर रहकर पार्टी के दिशा-निर्देशों को पूरा करने के लिए संगठित होकर काम करें…
BSP Supremo Mayawati : बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव 2024 अकेले दम पर लड़ने का ऐलान करके इन कयासों को खारिज कर दिया है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनेंगी। मायावती ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीनियर पदाधिकारियों तथा जिला अध्यक्षों की मौजूदगी में लखनऊ कार्यालय में आज शनिवार 20 जनवरी को एक महत्वपूर्ण बैठक कर कार्यकर्ताओं को चेताया कि हर प्रकार की अफवाहों के अलावा विरोधी पार्टियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकण्डों से दूर रहकर पार्टी के दिशा-निर्देशों को पूरा करने के लिए संगठित होकर काम करें।
मायावती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ऐसे समय में जबकि पूर्व में राजनीति के अपराधीकरण व अपराध के राजनीतिकरण की तरह वर्तमान में धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण हो रहा है, जिससे देश व जनहित प्रभावित हो रहा है और इसीलिए देश निर्माण में बहुजन समाज पार्टी की विशेष जिम्मेदारी है। जबरदस्त महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी आदि से दुखी व पीड़ित देश के लगभग 81 करोड़ से अधिक लोग जीने के लिए सरकारी अन्न के मोहताज हैं यह गम्भीरता से सोचने की बात है।
मायावती द्वारा महत्वपूर्ण मीटिंग को संबोधित करने के बाद पार्टी द्वारा जारी रिलीज में कहा गया है, लगभग सभी सरकारों द्वारा मीडिया व प्रचार के अन्य माध्यमों से अपार धन खर्च करके जो जनहित व जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं, वह जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं। इन सब चिन्ताओं के मद्देनजर अगले लोकसभा आमचुनाव 2024 का विशेष महत्व है, जिसके लिये पार्टी के लोगों को पूरी गंभीरता के साथ अच्छे व मजबूत पार्टी उम्मीदवारों को चुनने की जिम्मेदारी है, ताकि बेहतर रिजल्ट प्राप्त कर जनहित की मजबूत सरकार देश में बनाई जा सके।
गौरतलब है कि आज की बैठक से पहले बसपा प्रमुख मायावती ने यूपी व उत्तराखण्ड स्टेट को छोड़कर आल इण्डिया स्तर पर 17-18 जनवरी को दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठकों में अलग-अलग राज्यों की प्रगति रिपोर्ट ली थी। साथ ही कार्यकर्ताओं को लोकसभा आमचुनाव में पूरी तरह से जुट जाने का निर्देश देते हुये क्लियर कर दिया था बसपा को दूसरी पार्टियों के साथ चुनावी गठबंधन अथवा किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है, क्योंकि बार-बार धोखा खाना होशियारी नहीं है। गठबंधन के ऐसे कड़वे अनुभवों से कर्मठ कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है और मिशन कमजोर होता है।
छोटी-छोटी कैडर मीटिंगें करने सम्बंधी दिये गये जरूरी दिशा-निर्देशों आदि को पूरी लगन व निष्ठा से पूरा करने पर ज़ोर देते हुये मायावती ने कहा कि ऐसे समय में जबकि पूर्व में राजनीति के अपराधीकरण व अपराध के राजनीतिकरण की तरह वर्तमान में धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण उचित नहीं है, क्योंकि इससे देश व जनहित प्रभावित हो रहा है। साथ ही जबरदस्त महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी आदि से दुखी व पीड़ित देश के 81 करोड़ से अधिक लोग जीने के लिए सरकारी अन्न के मोहताज हैं, यह कोई इनकी रोटी-रोजी का स्थाई हल नहीं है।
मायावती ने कहा, सभी सरकारों की जनहित व जनकल्याण की सोच व कार्यशैली पर ऊंगली उठना स्वाभाविक है, क्योंकि इन सबसे यह साबित होता है कि इनकी नीतियों व कार्यक्रमों से कुछ मुट्ठीभर लोगों का तो जरूर भला हो रहा है, किन्तु देश के करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों आदि मेहनतकश लोगों का हित बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सरकारें आमजन के हित का संवैधानिक धर्म निभाने के बजाय केवल अपने.अपने वोट बैंक की चिन्ता में डूबी रहेगी तो इससे देशहित कैसे संभव है, जैसाकि आँकड़ों से स्पष्ट है कि देश में पूंजीपतियों की पूंजी तो लगातार बढ़ रही, किन्तु ना तो राष्ट्रीय सम्पत्ति का विकास हो रहा है तथा ना ही जनता खुश व खुशहाल हो पा रही है।
मायावती जी ने विश्वास दिलाया कि बसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो संवैधानिक आदर्शों व मूल्यों के आधार पर चलने वाली पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और सभी धर्मों व उनके धार्मिक स्थलों का पूरा-पूरा आदर-सम्मान करके सभी के साथ न्याय का व्यवहार करते हुये सभी के जान-माल व इज्जत-आबरू की सुरक्षा की गारण्टी सुनिश्चित करती है। देश में अगर दंगामुक्त सरकार किसी ने दी है तो वह सिर्फ बसपा की सरकार में रही है।
मायावती ने कहा कि बसपा की तरह ही दूसरी राजनीतिक पार्टियों को संविधान व धर्म का सम्मान करते हुये इसका दुरुपयोग नही करना चाहिये, जैसाकि अपने देश में अक्सर देखने को मिलता रहा है और अब तो यह खुलेआम हो रहा है।
वैसे भी केन्द्र व राज्यों की सरकारों द्वारा जो जनहित व जनकल्याण के बड़े.बड़े दावे किये जाते हैं वे जमीनी हकीकत से बहुत दूर है। लोगों के सामने महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि ऐसी घातक समस्यायें हैं कि जिसकी वजह से लोग काफी दुःखी व चिन्तनीय भी है।
इसके अलावा, दुनिया के भी हालात लगातार ऐसे खराब होते जा रहे हैं कि भारत को भी हर मामले में अपनी चिन्ता खुद ही करनी होगी और, जिसके लिए केन्द्र व राज्यों में जनहित की मजबूत सरकारों की जरूरत है, न कि मजबूत सरकारों के नाम पर हवा-हवाई सरकारों की इन सब चिन्ताओं के मद्देनजर देश में शीघ्र ही होने वाले लोकसभा आमचुनाव का, पिछले चुनावों से अलग, विशेष महत्व है, जिसके लिये पार्टी के लोगों को पूरी गंभीरता के साथ अच्छे व मजबूत पार्टी के उम्मीदवारों को चुनने की जिम्मेदारी है तथा जिसके लिये अब समय बहुत ही कम बचा है।
लोकसभा का आमचुनाव अकेले अपने बलबूते पर लड़ने के पार्टी के स्टैण्ड को दोहराते हुये उन्होंने कहा कि ऐसे में पार्टी के लोगों पर बेहतर रिजल्ट लाने की जबरदस्त जिम्मेदारी है और इसीलिए वे लोग मीडिया द्वारा फैलाई जाने वाली हर प्रकार की अफवाहों एवं मिथ्या प्रचार आदि के अलावा विरोधी पार्टियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से दूर रहकर पार्टी के दिशा-निर्देशों को पूरा करने के लिए संगठित होकर पूरे तन, मन व धन से इस ध्येय के साथ लगे रहें कि बाबा साहेब का अधूरा मिशन बीएसपी करेगी।
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