20 जनवरी 2025
प्रेस रिलीज़
बीते दिनाँक 20 जनवरी 2025 को ऑल इंडिया बहुजन कोआर्डिनेशन कमेटी के द्वारा अरविन्द केजरीवाल के दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज विरोधी नीतियों और मानसिकता के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस कर का आयोजन प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में हुआ था. जिसमें कई राजनीतिक दलों एवं संगठनों के लोगों ने अरविन्द केजरीवाल के दलित विरोधी मानसिकता का पर्दाफाश किया। इसके साथ-साथ आने वाले दिल्ली आम चुनाव के लिए दलित समाज को जागरूक किया.
मंजीत नोटियाल अध्यक्ष भीम आर्मी (जय भीम मिशन) ने अरविन्द केजरीवाल के जातिवाद और दलित विरोधी मानसिकता पर हमला करते हुए बोले कि “दलित समाज को वर्षों से बहिष्कृत कर हाशिए पर धकेल दिया गया, जो अपने मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में हम सभी लोगों को यह अधिकार दिया है कि दलित समाज भी बराबरी से सम्मानजनक जीवन जी सकें। बाबा साहेब के इसी सपने को साकार करने के लिए हमारा संगठन (भीम आर्मी) लगातार कार्य कर रहा है. ताकि दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक (बहुजनों ) तक संविधान में दिए गए लाभों का फायदा उठाकर अपने जीवन में बदलाव ला सकें।”
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उन्होंने कहा की अरविन्द केजरीवाल केवल दलित वोटर को रिझाने के लिए अपने आप को बाबा साहेब का अनुयायी बताते है. न ही उनको बाबा साहेब से कोई प्रेम है और न ही दलित समाज के विकास से. अरविन्द केजरीवाल की ‘सफाई कर्मचारी‘ सम्बंधित नीतियों पर हमलावर होते हुए उन्होंने कहा कि केजरीवाल सफाई कर्मचारी नीतियां फ्लाप रहीं है, क्योंकि उनकी नियत भी सफाई कर्मचारी विरोधी है. उन्होंने कहा, पिछले 10 दस सालों में 94 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, जिनमें से 34 मामले अभी तक लंबित हैं और किसी भी केस में किसी को भी न्याय नहीं मिला है। ये वो घटनाएं हैं जो दर्ज की गई हैं, ऐसे और बहुत सी घटनाएं होंगी जो सूची में दर्ज नहीं हैं। बात आगे पूरी करते हुए उन्होंने बताया– ऐसे कई केस अभी तक लंबित पड़ी हुई हैं जिन्हें कोई न्याय नहीं मिला है। 2013 में आम आदमी पार्टी ने स्वच्छ अभियान अधिनियम लागू नहीं किया, जिसके चलते बहुत से लोगों ने अपनी जान गंवा दी। नोटियाल का यह सवाल है कि क्या एक दलित व्यक्ति जो पैदा हुआ है, क्या वह सिर्फ मरने के लिए पैदा हुआ है? क्या उसका कोई जीवन नहीं है?
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आगे नोटियाल अरविन्द केजरीवाल की शिक्षा व्यवस्था पर हमलावर होते हए बोले कि दलित बच्चों को शिक्षा देने के लिए विशेष प्रावधान की जरुरत होती है. परन्तु केजरीवाल के तरफ से ऐसे कोई ठोस कदम दलित विद्यार्थियों के लिए नहीं उठाये गए। केजरीवाल ने अपने शिक्षा नीतियों को लेकर पूरी दुनिया में ढिंढोरा पीटा और खूब वाहवाही लूटी। परन्तु मुफ्त शिक्षा के नाम पर एससी, एसटी, ओबीसी समाज को कुछ भी नहीं मिला। आज दिल्ली का दलित समाज पिछड़ा, शोषित, गरीब, लाचार और असहाय महसूस कर रहा है। क्योंकि केजरीवाल के खोखले दावे इन सभी समाज के लोगों तक नहीं पहुंचे। उनके इन सभी योजनाओं के लाभ से उन्हें जानबूझकर दूर रखा गया है। केजरीवाल सरकार ने शिक्षा के लिए दलित व्यक्तियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए नहीं भेजा और न ही कुछ और व्यवस्था की उनके सरे दावे खोखले हैं।
राजेंद्र पाल गौतम (पूर्व मंत्री, दिल्ली सरकार)
राजेंद्र पाल गौतम एक दलित समाज से आने वाले राजेनता हैं, जो केजरीवाल सरकार में जल, पर्यटन, संस्कृति, कला एवं भाषाओं और गुरुद्वारा मत्रांलय के पूर्व मंत्री रहें हैं। अभी आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। राजेन्द्र पाल गौतम, केजरीवाल के ऊपर प्रहार करते हुए बताया कि किस तरह आम आदमी पार्टी न केवल दलित समाज को बल्कि पूरी दिल्ली की जनता को गुमराह कर रहें है। आगे उन्होंने ये बताया कि एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटीज को केवल झूठा वादा करके केवल बरगलाने का काम किया है। केजरीवाल की 200 यूनिट फ्री बिजली का बिल, फ्री पानी, महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा यह सिर्फ छोटी चीज़े है। जिसके आड़ में केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से बहुत कुछ छीन लिया है। उन्होंने कहा की अगर केजरीवाल दिल्ली के लोगों को रोजगार या नौकरी देते तो लोगों को ऐसे छोटे मोटे सरकारी सहयोग की जरुरत ही नहीं पड़ती। जिससे दिल्ली के लोग अपनी सारी मूलभूत जरूरतों को खुद ही पूरा कर लेते।
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रोजगार और तनख्वाह
आगे राजेंद्र पाल गौतम कहते हैं कि रोजगार को लेकर आम आदमी पार्टी ने आज तक कुछ भी नहीं किया है, क्योंकि केजरीवाल की नीयत ही ऐसी नहीं है। उदहारण के तौर पर हम देख सकते हैं कि दिल्ली अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ( DSFDC) कर्मचारियों की तनख्वाह समय से नहीं मिलती और ऐसा और हर बार कोई न कोई बहाना करके टाल दिया जाता है। इसके साथ साथ अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों और विकलांग लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी केजरीवाल की कोई रूचि नहीं रहती है, और न ही अनुसूचित जाति के लोगों को लघु व्यवसाय योजना के माध्यम से ऋण प्राप्त करने में सहायता प्रदान की।
शिक्षा
केजरीवाल सरकार ने शिक्षा के नाम पर केवल और केवल लोगों के बीच में खोखले दावे पेश किया। वास्विकता यह है कि शिक्षा के नाम पर इन्होने केवल प्राइमरी से लेकर 12 वीं तक शिक्षा पर काम किया। दिल्ली की जनता की उसके बाद की पढाई को उनके किस्मत पर छोड़ दिया। कक्षा 9वीं और 10वीं में 101,331 कुल छात्र और 11वीं और 12वीं में 501,914 कुल छात्र फेल हैं।
“केजरीवाल जो की बोलते हैं कि उन्होंने पूरे ‘एजुकेशन सिस्टम‘ को अच्छा कर दिया है मानो शिक्षा जगत में बहुत बड़ी क्रांति ला दी हो। “केजरीवाल कहते हैं कि 12 तक पढ़ा सकता हूँ, उसके आगे नहीं पढ़ा सकता।“
लेकिन वो सिर्फ 12 वीं तक की शिक्षा का जिम्मा लिया। लेकिन 12वी के बाद का क्या उसके जिम्मेरदारी कोन लेगा? कॉलेज की पढ़ाई का क्या होगा? क्या 12 वीं की पढाई करने मात्र से बेहतर नौकरी लग सकती? दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का यह हाल है कि सभी कॉलेजेस और विश्वविद्यालयों जैसे नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, डीयू यूनिवर्सिटी, इगनू यूनिवर्सिटी आदि में फण्ड के लिए केजरीवाल सरकार के तरफ से रोक दिया गया है। जिसके कारण सभी विश्वविद्यालय मजबूर हो चुके हैं बच्चों से ज्यादा से ज्यादा फीस लेने के लिए। सवाल उठता है कि क्या केजरीवाल सरकार के पास इन विश्वविद्यालयों एवं कालेजों को देने के लिए फण्ड नहीं है?”
स्कूल के बाद कॉलेज में एडमिशन का दर बहुत कम हो जाता है, जिसके दो–तीन मुख्य कारण राजेंद्र देते हैं:
1- कॉलेजों में कोई स्कॉलरशिप प्राप्त नहीं है।
2- फीस बहुत ज्यादा है।
3- SC, ST, OBC, Minority के लिए कोई सुविधा का प्रावधान नहीं है।
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उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार में बी.टेक का खर्चा पूरा 2 लाख 36 हजार, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) 4.25 लाख है। इस तरह पूरे वर्ष का 24 लाख का खर्चा। नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेकंड इयर में 4 लाख 25 हज़ार से सीधा 5 लाख है। हालत यह कि इसकी दर साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है।
स्कूल में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा की बात की जाती है, लेकिन पिछले साल के रिपोर्ट ने चिंता में डाल दिया है।आम आदमी पार्टी जो दावा करती है मुफ्त शिक्षा का, वह कौन सी शिक्षा की बात कर रही है? स्कूल में प्राप्त शिक्षा बहुत सामान्य शिक्षा है। जिसे आजकल कुछ भी नहीं माना जाता है। किसी भी व्यक्ति को आज के समय में ग्रेजुएट होना ही मायने रखता है ये केजरीवाल को बेहतर मालूम होगा। दिल्ली जैसी जगह जो देश की राजधानी हो वहां पर SC, ST, OBC, Minority वर्ग से आ रहे विद्यार्थियों को शिक्षा जैसी मूलभूत चीज भी प्राप्त नहीं है।
केजरीवाल पर कुश अंबेडकवादी ने साधा निशाना:
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनीतिक विश्लेषक और दलित राजनीति पर मुखरता से बात रखने वाले कुश अंबेडकरवादी ने भी दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस बार दिल्ली की जनता दलित विरोधी अरविंद केरजरीवाल को सबक सिखाएगी। अरविंद केजरीवाल जो अपनी कुर्सी के पीछे बाबा साहेब अंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीर लगा कर रखते हैं लेकिन जब अंबेडकवादी होने की बात आती है तो विचारों पर ताला लग जाता है। लेकिन वोट मांगने के लिए दलितों के बीच जाकर झूठे वादे करते हैं। आज भी दिल्ली की दलित बस्ती में अगर जाकर देखा जाए तो आपको पता चलेगा कि दिल्ली में मुफ्त बिजली-पानी का वादा करने वाली ये सरकार दलित बस्ती में साफ पानी तक मुहैया नहीं करवा पायी। कुश अंबेडकरवादी आगे कहते हैं कि, “इस बार हमें दिल्ली में बाबा साहेब के विचारों पर चलने वाला मुख्यमंत्री चाहिए ना कि ऐसा मुख्यमंत्री जो खुद को कृष्ण का वंशज बताए।
*दलित टाइम्स उन करोड़ो लोगो की आवाज़ है जिन्हें हाशिए पर रखा गया है। *
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